Hanuman Garhi is a historic and revered Hindu temple dedicated to Lord Hanuman, located in Ayodhya, Uttar Pradesh. This temple is among the most significant religious sites in Ayodhya and is especially important due to its proximity to Ram Janmabhoomi. Devotees believe that Lord Hanuman continues to protect the sacred city from this temple.
The temple is accessed by climbing 76 steps, a journey that many devotees undertake with devotion. Hanuman Garhi is one of the most prominent temples dedicated to Lord Hanuman in North India. A well-known tradition in Ayodhya states that before visiting Ram Lalla (Lord Ram’s temple), devotees should first seek the blessings of Lord Hanuman at Hanuman Garhi.
Inside the sanctum, an idol of child Hanuman is seated in the lap of his mother, Anjani. This depiction symbolizes the divine bond between the mother and son while emphasizing Hanuman’s ever-watchful protection over Ayodhya.
According to religious beliefs, after Lord Ram’s victorious return from Lanka, Hanuman Ji chose to reside in this place. Thus, it came to be known as Hanuman Garh or Hanuman Kot. Devotees strongly believe that Hanuman Ji guards Ramkot (the city of Lord Ram) and fulfills the wishes of his followers.
The temple complex spans approximately 52 bighas of land, making it a significant spiritual and residential center for saints and devotees. Hanuman Garhi also owns properties and monasteries in several sacred locations across India, including Vrindavan, Nashik, Ujjain, and Jagannath Puri. The temple is managed by saints from the Ramanandi sect and Nirvani Ani Akhara.
In 1855, the Nawab of Awadh took measures to protect the temple when disputes arose regarding its security. Historians note that a conflict emerged over the temple’s location and preservation, emphasizing its importance in the religious history of Ayodhya.
Hanuman Garhi celebrates several major Hindu festivals with grandeur, including:
हनुमान गढ़ी मंदिर उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भगवान हनुमान को समर्पित एक ऐतिहासिक और पूजनीय हिन्दू मंदिर है। यह मंदिर अयोध्या के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है और राम जन्मभूमि के निकट स्थित होने के कारण इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। श्रद्धालु मानते हैं कि हनुमान जी इस मंदिर से अयोध्या की रक्षा करते हैं।
हनुमान गढ़ी मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को 76 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जिसे श्रद्धालु भक्ति भाव से पूरा करते हैं। उत्तर भारत में भगवान हनुमान के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक माने जाने वाले इस मंदिर की परंपरा के अनुसार, रामलला (भगवान राम के मंदिर) के दर्शन से पहले हनुमान गढ़ी में हनुमान जी के दर्शन करना आवश्यक माना जाता है।
मंदिर के गर्भगृह में बाल हनुमान की मूर्ति उनकी माता अंजनी की गोद में स्थापित है। यह प्रतिमा माता-पुत्र के दिव्य संबंध का प्रतीक है और यह भी दर्शाती है कि हनुमान जी अयोध्या की सतत रक्षा करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, लंका विजय के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे, तब हनुमान जी इसी स्थान पर रहने लगे। इसलिए इस स्थान को हनुमानगढ़ या हनुमान कोट के नाम से जाना जाने लगा। भक्तों का यह भी विश्वास है कि हनुमान जी रामकोट (भगवान राम की नगरी) की रक्षा करते हैं और अपने श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।
हनुमान गढ़ी का विशाल मंदिर परिसर लगभग 52 बीघा भूमि में फैला हुआ है। यह मंदिर वृंदावन, नासिक, उज्जैन और जगन्नाथपुरी जैसे धार्मिक स्थलों में अपनी संपत्ति और अखाड़ों का स्वामित्व रखता है। मंदिर का संचालन रामानंदी संप्रदाय के संतों और निर्वाणी अनी अखाड़े द्वारा किया जाता है।
1855 में, अवध के नवाब ने मंदिर की रक्षा के लिए हस्तक्षेप किया, जब इसके अस्तित्व और सुरक्षा को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। इतिहासकारों के अनुसार, उस समय मंदिर की स्थिति को लेकर विभिन्न पक्षों के बीच संघर्ष हुआ था, जिससे इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का पता चलता है।
हनुमान गढ़ी मंदिर में प्रमुख हिन्दू पर्वों को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जिनमें शामिल हैं: